धोनी जब मैदान में आता है तो किसी शेर की तरह दिखाई देता है, वही शेर जैसे हाव-भाव और चाल ..लगता है जैसे मैदान में आते ही मार धाड़ शुरू हो जाएगी…लेकिन उसे तो कैप्टन कूल कहा जाता है.

कप्तानी में भारत के अन्दर उससे बढकर कोई नहीं, ये उसके आंकड़े बता देते है..अभी कप्तानी छोड़ने से पहले अपने साथी खिलाडियों के साथ वो वीडियो गेम खेल रहा था और उसके 30 मिनट बाद ही उसने कप्तानी छोड़ने का फैसला ले लिया, किसी को भनक तक नहीं आने दी ..सबको निराशा हुई, कि अब वो भारत के लिए बतौर कप्तान धोनी को खेलते नहीं देख पाएंगे..

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धोनी का ये फैसला हो या कोई और फैसला रहा हो सब असाधारण से लगते हैं.. लेकिन इस एक तरह का फैसला ले लेना, ये काम सिर्फ धोनी ही कर सकता है ..और यही बात उसको धोनी बनाती है ..क्रिकेट की दुनिया में फील्ड पर ऐसे चौकाने वाले फैसले जिनके बारे में कोई कप्तान सोच भी न सकता हो धोनी वो करके दिखा देता है..कप्तानी छोड़ने के इस बड़े फैसले के पीछे भी उसकी मनसा जरुर रही होगी..199 एक दिवसीय मैचों में कप्तानी करके छोड़ने वाला व्यक्ति स्वार्थी तो कभी नहीं हो सकता..

अपनी मेहनत के बल पर उसने सब कुछ पा लिया..जो एक इंसान सोच सकता है…ये मेहनत कितनी कड़ी हो सकती है इसका जवाब कोई धोनी से पूछे..भारतीय क्रिकेट को नये आयाम देने वाला खिलाड़ी, कप्तानी करते समय किसी सरल बाप की तरह खिलाडियों को समझाने वाला और जिस मैच में सांसे अटक जाएँ उसे बड़े इत्मिनान से जीता देने वाला.. विकेट के पीछे रह कर चमत्कार करने वाला...यही है असली धोनी…

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2019 में वर्ल्ड कप होना है और उसने बिना किसी स्वार्थ ये फैसला ले लिया ..ताकि आगामी समय में टीम उसके बिना जीतने की आदत बना सके..ये बात ठीक है कि विराट अच्छी कप्तानी कर रहें है और अगले कप्तान भी वहीं होंगे..लेकिन विराट को अभी लम्बा रास्ता तय करना और धोनी  दूरदर्शिता का प्रमाण है इन्ही सब चीजों को ध्यान में रख कर उसने हमेशा देश के लिए खेलने का उदाहरण दिया है..

हां सच में धोनी वो शेर है जिसने अपने बूड़े होने से पहले ही अपने शावकों के लिए मैदान छोड़ दिया ताकि उसके शावक खुद शिकार करके खा सके ..

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