क्रिकेट में युवराज जैसे बल्लेबाज़ सदियों में एक बार पैदा होता है.. और वो भी भगवान की कृपा रही तो.. जिस युवी को दोबारा से देखने के लिए उनके फैन्स की आँखें तरस गई थी वो फिर उसी नीली ड्रेस में अपने वजूद को दोहराता नज़र आया..वही हाव-भाव और वही तेवर, जैसे समय वापस लौट आया हो और थम सा गया हो..वो भी इसलिए के देख लो.. युवराज खेल रहा है.. साथी भी वही जिसको मीडिया वाले उसका दोस्त नहीं मानते..हाँ उसी की बात हो रही है, क्यूंकि..धोनी मार रहा था..

हालाँकि युवराज के पिता योगराज सिंह ने धोनी के लिए बहुत बुरा भला कहा..लेकिन युवराज सिंह ने इस बारे में कभी गलत नही बोला न ही धोनी ने…और दोस्ती की मिसाल आज भी कायम है ..जो देश देख रहा था …आपने भी देखा होगा…

युवराज ने दमदार खिलाड़ी के रूप में नाम तो कमाया, लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया..2011 के वर्ल्ड कप में किसी योद्धा की तरह लड़ा और आंकड़े इस बात के साक्षी हैं..मैच के बाद खुद युवराज ने जो भी कहा, वो भावुक करने वाला था…

युवराज ने कहा, ‘मैंने पिछली बार 2011 के विश्व कप में शतक लगाया था।’ युवराज ने जहां 6 साल के बाद पहला शतक लगाया है वहीं धौनी ने कप्तानी त्यागने के बाद पहली बार शतकीय पारी खेली। युवराज ने कहा, ‘मैं धौनी के साथ काफी पहले से खेलता आया हूं। हमारे बीच अच्छी समझ है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हम ऐसी और पारियां खेलेंगे।’

युवी ने कहा, ‘मैं जिस लड़ाई को लड़कर यहां आया हूं, उसके बारे में सिर्फ मैं ही जानता हूं। मुझे पता नहीं था कि मैं दोबारा खेल पाऊंगा भी या नहीं। लोगों ने भी विश्वास खो दिया था, लेकिन मैंने अपना विश्वास बना कर रखा। मैंने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। मेरी सोच है- कभी हार मत मानो।‘

युवराज ने कहा, ‘यह संभवत: मेरी सर्वश्रेष्ठ पारी है। मैंने निचले क्रम के बल्लेबाज के रूप में शुरुआत की थी, लेकिन ऊपरी क्रम में आने पर आपको अधिक गेंदें खेलने को मिलती हैं। मेरे लिए 150 रन लक्ष्य था। जब आप 30 के पार हो जाते हो तो आपको अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।’

युवराज सिंह ने स्वीकार किया कि उनके दोबारा टीम इंडिया में होने में कई लोगों का हाथ है। इसके साथ ही उन्होंने इंग्लैंड की टीम की काफी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ‘नई इंग्लैंड टीम काफी खतरनाक है। उसके मध्यक्रम के बल्लेबाज किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकते हैं। पहले उनके पास फ्लिंटॉफ और हार्मिसन थे और अब भी अच्छे बल्लेबाज हैं।‘

करियर में बड़े उतर चढ़ाव  के चलते युवराज को, वो सब देखना पड़ा जिसकी कोई खिलाड़ी तो कम से कम, कल्पना भी नहीं कर सकता है..उसने अपने खेल को जीना नहीं छोड़ा और कभी  हिम्मत नहीं हारी…किस्मत के खेल में उसने जीत हासिल की है….जिन्दगी के इस खेल में भी वो जीतता नज़र आ रहा है और ऐसा लग रहा है कि जैसे अपने फैन्स को विश्वास दिला रहा हो…मैं युवराज ..भूले तो नहीं आप….युवराज वो है जिसने आत्म विश्वास में फिर से जान डाल दी..वरना किस्मत ने तो सब कुछ छीन सा ही लिया था…लेकिन वो किसी भूखे शेर की तरह शिकार की तलाश में लगा रहा, क्यूंकि रुकना उसने कभी सिखा ही नहीं था….

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